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फोलिक एसिड (Folic Acid) – शरीर में फोलिक एसिड की कमी होने के कारण बाल झड़ने और समय से पहले सफ़ेद होने लगते है| शरीर में फोलिक एसिड का संतुलन बहुत जरुरी है, इसका संतुलन बिगड़ने के कारण भी बाल झड़ने लगते है| फोलिक एसिड की मात्रा आपको कितनी लेनी होगी, इसके लिए किसी डायटिशियन से सलाह ले| हरी सब्जियों, दाल और ब्रोक्ली जैसी चीजों का सेवन करने इसकी कमी को दूर किया जा सकता है|

पारिजात- आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार पारिजात की पत्तियों और बीजों का चूर्ण तेल में मिलाकर प्रतिदिन रात को बालों की जडों में मालिश करने से बालों का पुन: उगना शुरू हो जाता है, साथ ही, बालों के झडने को रोकने में मदद करता है।

कोर्टिकॉस्टिरॉइड दवाओं में स्टेरॉयड होते हैं, हार्मोन का एक प्रकार। वे प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाकर काम करते हैं (संक्रमण और बीमारी के खिलाफ शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा)। यह खालित्य areata में उपयोगी है क्योंकि इस स्थिति को रोम के रोमों को नुकसान पहुंचाने वाली प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण माना जाता है।

प्लान्टेशन के लिए, सर्जन को हेयरलाइन की अपीयरेंस निर्धारित करनी पड़ती है तथा फिर इसे खींचना पड़ता है। ट्रांसप्लांट करने के लिए नियोजित बालों की मात्रा, रोगी की उम्र, मूल बालों की अग्रिम हानि की संभावना, प्राकृतिक अपीयरेंस, नियोजित बालों का घनत्व, आदि वे सभी कारक हैं जिन पर विचार किए जाने की आवश्यकता होती है। हेयरलाइन की ड्राइंग विज्ञान से ज्यादा एक कला है।

कम से कम सप्ताह में एक दिन शंखपुष्पी से बना हुआ असली और शुद्ध चूर्ण थोड़े से पानी में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। इसके अलावा भृंगराज के चूर्ण में थोड़ा तिल मिलाकर खाएं।प्याज के रस बालो में लगाने से बालो का झड़ना कम होता है। इन आयुर्वेदिक उपचार से आपके बाल प्राकृतिक रूप से स्वस्थ एवं मजबूत बनेंगे।

अगर बालों के झड़ने बीमारी दूसरे से है कारण होता है, बीमारी के इलाज के उपचार का सबसे अच्छा बालों के झड़ने. अगर बालों के झड़ने समस्या सिर्फ तुम्हें देख रहा है, तो वहाँ कई अलग अलग यह कैसे गंभीर बालों के झड़ने के आधार पर इलाज के लिए तरीके हैं.

बालों के गिरने की एक अहम् वजह तनाव भी है। तनाव से कई और बीमारियाँ भी पैदा होती हैं, इसीलिए इन बीमारियों से बचने के लिए, और बालों को गिरने से बचाने के लिए तनाव से दूर रहिये। हालांकि ऐसा कहना बहुत आसान होता है, लेकिन अगर आप पूरी तरह स तनाव से छुटकारा नहीं पा सकते तो इसे कम तो कर सकते हैं। और तनाव कम करने के लिए आपको अपनी सोच को बदलना होगा, और योग, मेडीटेशन, वगैरह जैसे उपायों से इसे कम कर सकते हैं।

डिस्पेंस्सीप्रोन (डीपीसीपी) नामक एक रासायनिक समाधान को गंजा त्वचा के एक छोटे से क्षेत्र में लागू किया जाता है। हर बार डीपीसीपी की एक मजबूत खुराक का उपयोग करके हर हफ्ते यह दोहराया जाता है समाधान अंततः एक एलर्जी प्रतिक्रिया का कारण बनता है और त्वचा हल्के एक्जिमा (जिल्द की सूजन) विकसित करती है। कुछ मामलों में, यह लगभग 12 हफ्तों के बाद बाल regrowth में परिणाम है।

कुछ लोगों में ख़ानदानी वजह से गंजापन होता है. 30 साल की उम्र तक आते आते 25 से 30 फ़ीसद मर्दों के बाल झड़ने लगते हैं. ये किसी खास मुल्क़, ज़ात या कौम में नहीं होता है, बल्कि सारी दुनिया में ऐसा होता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि आख़िर मर्दों में ही गंजापन ज़्यादा क्यों होता है? और मर्द अपने बालों को लेकर आखिर इतने परेशान क्यों रहते हैं?

हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसकी मदद से सिर के पिछले व साइड वाले हिस्से से, दाढ़ी, छाती आदि से बालों को लेकर सिर के गंजे भाग में implant कर दिया जाता है। इसकी वजह यह कि सिर के पिछले हिस्से के बाल आमतौर पर नहीं झड़ते इस लिए सिर के पीछे के बाल ही implant किये जाते हैं। हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी के तकरीबन २ हफ्ते बाद बाल उगने शुरू हो जाते हैं और पूरे बाल आने में ८ -१० महीने का समय लगता है। शर्त यह है आपको डॉक्टर दुवारा दी गई हिदायतों का पालन करना होता है। यह बाल बिलकुल कुदरती बालों की तरह होते हैं जीने आप कटवा सकते हैं, कलर कर सकते हैं और अपना मनचाहा हेयर स्टाइल रख सकते हैं। आँखों की पलकों, भौहों या दाड़ी के बालों की समस्या को भी इस तकनीक से दूर किया जा सकता है।

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